सतगुरुदेव जी की अमृतमय दया की वर्षा
बन्दी छोड़ सतगुरू रामपाल जी महाराज की जय
मैं भक्त श्याम दास (श्याम सापकोटा) हूँ। मैं मधवलिया-8 कोटिहवा, रूपन्देही नेपाल का निवासी हूँ तथा पेशे से मैं नेपाल सरकार के उपसचिव पद में भू तथा जलाधार संरक्षण विभाग ववरमहल, काठमांण्डू नेपाल में कार्यरत हूँ। विक्रम सवंत् 2060ध-8-92 तक कार्यकाल है। मैं कई रोगों से परेशान था तथा साथ-साथ ”ओम्” मंत्रा का जाप तथा ध्यान भी करता था। ओम् शान्ति (ब्रह्म कुमारी राजयोग) का सात दिन का तालिम भी ले रखा था, परन्तु अस्पताल आना जाना चलता ही रहा। ध्यान में बैठते वक्त श्री गणेश जी, ब्रह्मा सावित्रा, विष्णु लक्ष्मी, शिव पार्वती, विभिन्न मानवां, जानवरों और जंगल, नदी-नाला आदि के दृश्य कभी-कभी दिखाई देते थे। फिर भी मेरे रोगों की सख्या बढ़ती ही चली गई। जो रोग मुझे थे उनका विवरण निम्न हैः-
1 मेनियाँ- मैं साइकेटीक होकर दो बार हास्पिटलाइज हुआ था दोनों बार बहुत सारे टैबलेट दिए गए, जिन्हें दिन में तीन बार खाना पड़ता था।
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हाथकाँपना- मेरे दोनों हाथ बड़ी जोर से काँपते थे। जिसके वजह से में दस्तखत भी सही ढ़ंग से नहीं कर पाता था। 3ण़् 3आँखो की कमजोरी - मैं का पावर लेन्स पहनता था।
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पाईल्स (बवासीर) - दो तीन वर्षों से इस रोग से परेशान था। आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथिक दवाइँया ली थी पर कुछ समय ठीक होता था और फिर ठसममकपदह शुरू हो जाती थी।
5 यूरिक एसिड- दोनों घुटनों और ज्वाइन्टस में तीव्र पीड़ा होती थी, रोग निवारण हेतु मैंने एलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक दवा भी ली।
6 गैस्ट्रीक- बहुत पहले से छाती तथा पेट में जलन होती थी ड्राइफूट तथा तेल का खाना, चाय या ठण्डा खाना खाने से तुरन्त जलन शुरू हो जाती थी। मैं परेशान हो जाता था और एलोपैथिक औषधियाँ खाता रहता था।
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बड़ा पेट- बड़ा पेट होने की वजह से पैदल चलने से बहुत जल्दी थक जाता था और चढ़ाई पर तो 5 मिनट चलना भी बहुत कठीन होता था। निम्नलिखित रोगों और घरेलू विविध समस्याओं से हैरान परेशान था।
एक बार में अपनी ससुराल (उदाहरण-4 बाज गंगा, कपिलवस्तु) से घर वापस आ रहा था तो (हाइवे नम्बर 4, 4 बाजगंगा, कपिलवस्तु) नेपाल में “ज्ञान गंगा” पुस्तक का प्रचार-प्रसार हो रहा था, मेरी पत्नी ने एक पुस्तक ले ली। मैंने पुस्तक को ध्यान लगा के दो तीन बार पढ़ा और संस्कृत श्लोकों को सम्बन्धित वेद एवं श्रीमद्भगवत गीता से मिला कर देखने के लिए इंटरनेट से ढूढकर परीक्षण करने की कोशिश भी की, मुझे ज्ञान बहुत अच्छा लगा। इसलिए मैंने सतलोक आश्रम चण्डीगढ़ रोड बरवाला जिला हिसार हरियाणा में पहुँचकर जगत गुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से प्रथम मंत्रा दीक्षा दिनांक अप्रैल 2012 को तथा सतनाम मंत्रा दीक्षा 2 नबम्वर 2012 में प्राप्त की। अब मैं मेनियाँ रोग का एक टेबलेट दवाई (ऐलोपेथिक स्पजीपनउ 400 उह) प्रत्येक शाम को खाता हूँ। परमेश्वर कि कृपा से अब मुझे साइक्रोटिक सिम्टम नहीं है तथा मेरा हाथ काँपना बन्द हो गया है और अब मैं अच्छे-खासे अक्षर लिख लेता हूँ। अब मेरी आँखों का चश्मा भी हट गया है। अब मुझे पत्रिका पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत भी नहीं पड़ती है, पाईल्स (बवासीर) भी 5.6 महीनों से ठीक है तथा अब मैं यूरिक एसिड की दवा खाना और परहेज करना छोड़ चुका हूँ। एक बार मेरी छाती और पेट में बहुत जलन हुई मैंने जनवरी 29.2013 की रात को जगत गुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी का स्मरण किया, तभी सतगुरू का एक श्रीचरण मेरी छाती व पेट के ऊपर चलता हुआ दिखाई दिया। उसके कुछ ही देर बाद मेरी छाती व पेट की जलन समाप्त हो गई। मैंने उसकी कोई भी दवाई नहीं खाई। मेरा सर्व भक्त आत्माओं से न्रम निवेदन है कि आप पवित्रा पुस्तक “ज्ञान गंगा” और “धरती पर अवतार” को पूर्ण श्रद्धा के साथ पढं़े तथा परमात्मा के तत्वज्ञान को समझकर सतलोक आश्रम चण्डीगढ़ रोड़, बरवाला जिला हिसार, हरियाणा (भारत) में आकर नाम दीक्षा लेकर अपना आत्मकल्याण करवाऐं तथा रोग, शोक, चिन्ता आदि सर्व दुःखों का नाश करा कर इसी जन्म में सुस्वास्थय और सुख समृद्धि प्राप्त करते हुए अपनी सत्यभक्ति पूर्ण करके अपने निजधाम सतलोक (जहां से हम आये थे) को पुनः प्राप्त करें।
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
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